फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानव जीवन की आचार संहिता है गीता

Thu, 21 May 2015 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। भारतीय सांस्कृतिक परिषद की ओर से नव संवतसर कीलक के सम्मान में आवाहन समारोह के तहत बंधवा हनुमान मंदिर परिसर में बुधवार से तीन दिनी गीता व्याख्यानमाला की शुरुआत की गई।  गीता मर्मज्ञ और इंटरनेशनल गीता गुरुकुल फाउंडेशन के संस्थापक योगी आनंद ने कहा, गीता भले ही कृष्ण और अर्जुन संवाद के रूप में जन साधारण को प्राप्त हुई हो, लेकिन इसके वास्तविक श्रोता तो अर्जुन के रथ पर विराजमान बजरंग बली ही हैं। अर्जुन तो गीता श्रवण के समय अनेक झंझावतों एवं वैचारिक द्वंद्वों की विभीषिका से ग्रस्त थे।
विज्ञापन


बतौर मुख्य अतिथि पुलिस महानिरीक्षक (बजट) लालजी शुक्ल ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्मनिष्ठ और भक्तिनिष्ठ बनाने वाला ग्रंथ है।  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। बाद में उन्होंने कहा, गीता मानव जीवन की आचार संहिता है। इस अवसर पर सांस्कृतिक परिषद की ओर से उनका सम्मान भी किया गया।

इस दौरान प्रसिद्ध भजन गायक रत्नेश दुबे और साथियों ने भजन प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर किया। संचालन परिषद संस्थापक फूलचंद्र दूबे ने किया। कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष दुर्गेश दूबे, रामजी शुक्ला, देवव्रत साहा, कथा वाचिका स्तुति, रविराज सिंह, रवि वर्मा, डीके सिंह, मधु चकहा, डॉ. सत्या पांडेय,जितेंद्र गौड़ आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें