इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक महाविद्यालयों में सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) में लेटलतीफी के कारण सत्र पिछड़ गया है। कई कॉलेजों में तो अब तक स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाओं का संचालन भी शुरू नहीं हुआ है। पांच माह बाद वार्षिक परीक्षा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सालभर का पाठ्यक्रम पांच माह में कैसे पूरा होगा।
सीयूईटी में लेटलतीफी के कारण पिछले साल भी स्नातक प्रथम वर्ष का सत्र देर से शुरू हुआ था और इस बार भी यही हालत है। यही वजह है कि इविवि के एकेडमिक कौंसिल को विचार करना पड़ा कि अगले साल से सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश लिए जाएं या नहीं। फिलहाल विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्र को पटरी पर लाना है।
कॉलेजों में सत्र पिछड़ने के साथ इस बार प्रवेश भी बहुत कम हुए है। ज्यादातर कॉलेजों में बीए की 40 से 50 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं। कई जगह कक्षाओं का संचालन अभी शुरू हुआ है। पिछली बार इविवि प्रशासन को पाठ्यक्रम में कटौती करनी पड़ी थी। इस बार भी पाठ्यक्रम में कटौती की जा सकती है या स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षाओं को एक या दो माह के लिए टाला जा सकता है।
हालांकि, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सत्र को पटरी पर लाने के लिए विकल्प काफी सीमित हैं। वहीं, बीएएलएलबी के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसंबर में प्रस्तावित हैं, जबकि इस पाठ्यक्रम में भी अक्तूबर तक प्रवेश लिए गए। ऐसे में पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं भी समय से हो पाने की उम्मीद कम है।