इलाहाबाद। भवन उपविधि में तय मानक होटल बनाने वालों के लिए बेमानी है। इसके तहत होटल का निर्माण कुल जमीन के 40 फीसदी हिस्से में होना चाहिए। होटल अगर चार हजार वर्गमीटर जमीन पर बन रहा है तो सड़क की चौड़ाई 18 मीटर, दस हजार वर्गमीटर पर है तो सड़क 24 मीटर और इससे अधिक जमीन पर बन रहा तो सड़क की चौड़ाई 30 मीटर होनी चाहिए। इसमें सेटबैक के साथ आग से बचाव के इंतजाम अति आवश्यक है। इसके साथ बालकनी, वेंटिलेशन, गैलरी से हवा आरपार होने की व्यवस्था आवश्यक है। इसके साथ बिजली की वायरिंग भी इस तरह हो की, ज्यादा से ज्यादा तार बाहरी दीवारों के सहारे लगाए जाएं, ताकि अगर शार्ट सर्किट से आग लगे और धुआं उठे तो वह बाहर की ओर निकल सकें।
एडीए के मुख्य नगर नियोजक पीके सोलंकी कहते हैं कि गर्मी में एसी के तार की वजह से शार्ट सर्किंट की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में एसी की वायरिंग होटल के अंदरूनी दीवारों के सहारे होनी चाहिए। क्योंकि बाहर की दीवार गरम होती है और एसी का तार भी तेजी से गरम होता है, जिससे आग लगने की संभावना ज्यादा होती है। उनका कहना है कि होटल की इमारत को चारों तरफ शीशा लगाकर पैक नहीं करना चाहिए। कमरों और गैलरी में कारपेट भी नहीं बिछाना चाहिए क्योंकि उसमें नॉयलन होता है जो आग को तेजी से पकड़ता है। बालकनी होने का फायदा यह है कि अगर आग लगती है तो लोग वहां पहुंचकर बचाव का प्रयास कर सकते हैं।