मौसम का मिजाज और सूरज की तल्खी बरकरार है। पारा उछलकर इस सीजन के अधिकतम पायदान 46.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। दिन भर चटख धूप खिलने से आसमान से आग बरसती रही। लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। पछुआ हवाओं के झोंको से रही सही नमी भी गुम हो गई। इस कारण लू के थपेड़ों ने भी झुलसाया। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। वहीं लू लगने से बारा में चितौरी गांव निवासी रामनरेश पटेल की मौत हो गई।
गर्मी के तेवर तो मार्च के महीने से ही तीखे हो गए थे। अप्रैल में 19 तारीख को ही पारा 46.5 डिग्री पर पहुंचा तो संकेत मिले थे कि इस बार प्रचंड गर्मी रिकार्ड तोड़ेगी। मौसम विज्ञानियों ने भी इसी तरह की संभावना जताई थी। अब मई में सूखी गर्मी के साथ लू के थपेड़े लोगों की परेशानी का कारण बने हैं। 13 मई को अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री पर था लेकिन न्यूनतम तापमान अब तक के उच्चतम स्तर पर 31.8 डिग्री पर रहा। रविवार को पारा 46.8 फिर सोमवार को 46.2 डिग्री पर आया लेकिन तपिश से राहत नहीं मिली।
मंगलवार को परा सीजन के अधिकतम स्तर 46.9 डिग्री पर पहुंच गया। पछुआ हवाओं की रफ्तार भी तेज रही। घर से बाहर निकले लोगों को लू झुलसाती रही। सूरज के ताप से तवा बनीं सड़कें भी आग उगल रही हैं। पेड़ों की छांव भी बेमानी हो रही है। प्रशासन ने छोटे बच्चों पर तो रहम दिखाया लेकिन स्कूल जाने वाले अन्य बच्चे गर्मी से व्याकुल हो रहे हैं।
मौसम विज्ञान प्रोफेसर एसएस ओझा के मुताबिक मई मध्य में प्रचंड गर्मी की संभावना थी। अब अरब सागर की तरफ से केरल-कर्नाटक में प्री मानसून का समय है। यह स्थिति यहां आने में 15 से बीस दिन लग सकते हैं। ऐसे में पारा अभी और चढ़ सकता है, जो अच्छे मानसून का कारण बनेगा।