केपी ग्राउंड में आयोजित होली महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं भोजपुरी कलाकार अक्षरा सिंह।
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होली के सुरों के रंग में संगमनगरी शनिवार रात रंग गई। भोजपुरी अभिनेत्री और मशहूर लोक गायिका अक्षरा सिंह ने सुरों की चासनी में होली गीतों के रागों को घोला तो फागुनी मादकता में लोग मदहोश होकर झूमने लगे। केपी ग्राउंड में सुरों के साथ होली की मस्ती और धमाल की यह संगीत निशा देर रात तक चलती रही।
अभिनेत्री अक्षरा सिंह रात 10 बजे जैसे ही मंच पर आईं, सीटियों के शोर के साथ युवाओं की भीड़ दर्शक दीर्घा से बेकाबू होकर बैरिकेडिंग से बाहर निकलने को बेकरार हो गई। अक्षरा भोजपुरिया अंदाज में ही युवा संगीत रसिकों का अभिवादन भी किया। उनका कहना था कि रउवा सभे रुकि जाएब, नाहीं त हम रउवे लोगन के बीचे आ जाइब...इस पर हर हर महादेव के जयकारे लगने लगे।
महाकुंभ के ऐन बाद होली महोत्सव में पहुंची अभिनेत्री अक्षरा ने परंपरा और संस्कृति का निर्वाह भी बखूबी किया। उन्होंने शुरुआत प्रभु श्रीराम सबके हैं... हे दुख भंजन मारुति नंदन ... जैसे प्रभु श्रीराम और वीर हनुमान जी की आराधना से की। इसके बाद वह भुजपुरिया मिठास के आंगन में कोकिल कंठों से सुर साधने लगीं। अक्षरा की आवाज की खनक और भोजपुरी धुनों की लोच ने हर किसी का दिल जीता। प्रियतम के विरह और प्रेम पर आधारित कईगीतों से उन्होंने रस घोल दिया। उनके गीत के बोल थे-सांवरी सुरतिया मोहनी मुरतियां... बड़ा नीक लागे ओनकर मीठी-मीठी बतिया....।
मुस्की पर सइंया के लुभा गइलीं... के बाद उन्होंने गीत सुनाया कि जइसन चोले रहली ओइसन सइयां मोर बाड़न, सांवर न गोर बाड़न हो...। उधर से जवाब आता है कि जइसन सोचले रहलीं ओइसन धनियां मोर बाड़ीं, सांवर न गोर बाड़ी हो.... थोड़े छरहर पातर थोड़े-थोड़े गोर बाड़ीं सांवर न गोर बाड़ी हो...। इस गीत पर युवाओं ने जमकर धमाल मचाया। तमाम संगीत प्रेमी अक्षरा के साथ ठुमके लगाने लगे तो लोग अपनी सीट से खड़े होकर सीटियां बजाते हुए थिरकते रहे।