लोकनाथ की कपड़ा फाड़ होली सबसे निराली है। होली की मस्ती छाते ही यहां कपड़ा फाड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है। एक दूसरे के कमर के ऊपर के कपड़े फाड़-फाड़ करके ऊपर केबल और तारों पर लटके देखे जा सकते हैं।
रंगों की बारिश के लिए खास इंतजाम किए गए थे। रंग और अबीर का ऐसा संगम होता है कि रंगों के बादल जैसा समां बंध जाता है।
होली के पर्व पर कीडगंज, सदियापुर सहित शहर के कई मोहल्लों, बस्तियों में होली खेली गई। लोगों ने एक-दूसरे को रंग से सराबोर करके होली का आनंद लिया। युवाओं, बच्चों के साथ महिलाएं भी अपनी टोलियों में मगन रहीं।
जीरोरोड चौराहे पर बृहस्पतिवार को गजराज संग होली खेली गई। होली के रंग में रंगे गजराज ने सूंड से रंग बरसाकर लोगों को रंगों से सराबोर किया। होली की शुरुआत विधिविधान से पूजन-अर्चन से हुई।