125 फीट लंबा, 125 चौड़ा और 128 फीट ऊंचा था मंदिर
मंदिर के मॉडल को लकड़ी से तैयार करने में एक साल का समय लगा। आठ मंडप और एक शिखर वाले इस मॉडल को पुराने मंदिर के आधार पर ही तैयार किया गया है। आदि विश्वेश्वर मंदिर 125 फीट लंबा, 125 फीट चौड़ा और 128 फीट ऊंचे था। मंदिर में बनाए गए शृंगार मंडप, ऐश्वर्य मंडप, ज्ञान मंडप, मुक्ति मंडप पूरी तरह खाली थे। इसके अलावा गणेश मंडप, दंडपाणि मंडप, तारकेश्वर मंडप और भैरव मंडप में देवताओं के विग्रह विराजमान थे।
मंदिर के मूल मंडप के नीचे गर्भगृह था, जिसमें भगवान शिव के प्रतिरूप का भव्य शिवलिंग विराजमान था। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पश्चिम में, उत्तर में नंदी, पूर्व में प्रवचन कक्ष तथा दक्षिण में गर्भगृह स्थित शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल निकासी को वर्तमान में ज्ञानवापी कूप कहा जाता है। मंदिर के नीचे एक बेसमेंट है, जिसे तहखाना कहा जा रहा है, जिसकी गहराई सात फिट है। इसको बनाने के लिए अलग-अलग ग्रंथों, पुस्तकों का अध्ययन किया गया।
पहली बार महाकुंभ में जन्मभूमि से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरों को किया सार्वजनिक
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से त्रिवेणी के तट पर जन्मभूमि के प्राचीन दस्तावेज और चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। सेक्टर-16 में लगी प्रदर्शनी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह पहला मौका था जब महाकुंभ में जन्मभूमि से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरों को सार्वजनिक किया गया था। इसके अलावा औरंगजेबनामा, मासीर ए आलमगिरी, औरंगजेब का इतिहास, जनवरी 1670 में मथुरा के कृष्ण मंदिरों को तोड़कर मूर्तियों को मस्जिद की सीढि़यों में लगाने का फरमान भी प्रदर्शनी का हिस्सा बना था। न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि महीने भर तक लगी प्रदर्शनी को साढ़े छह करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने देखा है। प्रदर्शनी में जन्मभूमि के मामले से जुड़े कई दस्तावेजों को महाकुंभ में पहली बार सार्वजनिक किया गया था। इसके जरिए आम जनता को जन्मभूमि के लिए जागरूक करना ही उद्देश्य था।
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