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हिम्मते मर्दां, मदद-ए-खुदा

Sat, 08 Aug 2015 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जारी। ऊपरवाला भी उन्हीं का साथ देता है जो मुसीबतों से लड़ते हैं। मिसाल भी है हिम्मते मर्दां, मदद-ए-खुदा। इस मिसाल पर खरे उतरते हुए लोटाढ़ के राहुल ने हरदा दोहरे ट्रेन हादसे में मौत को मात दे दी। शुक्रवार को इस हादसे से जान बचाकर लोटाढ़ गांव स्थित अपने घर पहुंचे राहुल ने उस काली रात की कहानी बयां की जिसे सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
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शुक्रवार शाम गांव वापस पहुंचा राहुल सबसे पहले जारी बाजार के अपने दोस्तों से मिला। दोस्तों ने अस्पताल ले जाकर उसका प्राथमिक उपचार कराया। यहां से सब उसे लेकर लोटाढ़ गांव उसके घर पहुंचे। हरिश्चन्द्र मिश्र का तीसरे नम्बर का बेटा राहुल मिश्र (27) बाम्बे में नौकरी करता है। उसने हादसे की जो क हानी सबको सुनाई उसे सुनकर लोगों का रोंया कांप उठा। वह गत मंगलवार को जनता एक्सप्रेस से इलाहाबाद से रवाना हुआ था। राहुल ने बताया कि हादसे के बाद उसके शरीर का आधा हिस्सा बोगी के सीटों के नीचे फंसा हुआ था और उसके ऊपर से लोग खिड़कियाें से चढ़कर छलांग लगा रहे थे।

उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर जब बाहर निकलने की कोशिश की तो मालूम हुआ कि उसका एक हाथ और एक पैर काम नहीं कर रहा था। कुछ लोगों ने उसे खींचकर पानी में छोड़ दिया। सभी लोग पानी में तैरकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। उसका आधा शरीर घायल था फिर भी वह तैरता रहा। उसने बताया कि बचपन में गांव में तालाबों में तैरना उसके काम आया। वह आधी रात को अंधेरे में घंटों तैरता हुआ किनारे आया। नदी में मगरमच्छ का भी डर लग रहा था। हिम्मत करके किसी तरह रेलवे ट्रैक पकड़कर लोगों के झुंड के साथ बैठते-चलते इटारसी रेलवे स्टेशन तक पहुंचा।
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35 किलो मीटर के करीब पैदल चलकर वह दिन चढ़े इटारसी पहुंचा। शरीर थक कर चूर हो गया था शरीर और पसलियों में भारी दर्द था। इटारसी से उसे दूसरी ट्रेन में इलाहाबाद के लिए बैठा दिया गया। उसका सारा सामान मोबाइल, लैपटाप, पर्स, मार्कशीट पानी में डूबी बोगी में ही रह गया। राहुल के अनुसार ट्रेन हादसे का भयानक मंजर और अंधेरे में चीख पुकार की आवाजें अभी भी उसके कान में गूंज रहीं हैं। कहता है, भीगे कपड़ों में रात भर घायल अवस्था में लंबी दूरी तक पैदल चलना शायद मैं कभी न भुला पाउंगा। ऊपर वाले ने जान बख्श दी इसके लिए ईश्वर को ही धन्यवाद दूंगा।
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