इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की नियम विरुद्ध तरीके से कटाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि वृक्ष संरक्षण कानून के उपबंधों के विपरीत पेड़ न काटे जाएं और राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई तीन फरवरी को होगी।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने प्रयागराज की आकांक्षा यादव की जनहित याचिका पर दिया है। अधिवक्ता अंजली सिंह का कहना है कि प्रयागराज में राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक बाउंड्री वाल तोड़ी जा रही है और पर्यावरण की धरोहर सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ों को काटा जा रहा है। जिससे न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा वरन वायु प्रदूषण बढ़ेगा।
याची का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को कटने वाले पेड़ो का दो गुना पौध लगाने व संरक्षित करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद बिना पौध लगाए मनमाने तौर पर पेड़ों को काटा जा रहा है। याची ने सुझाव दिया है कि पेड़ों को काटने के बजाय तकनीकी के जरिये शिफ्ट करने की कोशिश की जाए और अधिक संख्या में पौध रोपण किया जाए।