चोरी गई कार की लोन की रिकवरी के लिए गलत तरीके से रिकवरी सार्टिफिकेट जारी करने पर बैंक ऑफ बड़ौदा मुंडेरा ब्रांच, प्रयागराज के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक को हाईकोर्ट में माफी मांगनी पड़ी। कोर्ट ने शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी है कि वह भविष्य में इस प्रकार की गलती ना करें और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही कार्यवाही करें। कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद बैंक ने रिकवरी सर्टिफिकेट वापस ले लिया था। इसलिए कोर्ट ने चेतावनी देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। कीडगंज के मनोज अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसके गुप्ता और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है।
याची के अधिवक्ता अयंक मिश्रा और विवेक कुमार श्रीवास्तव का कहना था की याची ने 2011 में बैंक ऑफ बड़ौदा की मुंडेरा ब्रांच से कार खरीदने के लिए पांच लाख रुपये लोन लिया था। अगस्त 2011 में उसने अपनी कार रजिस्टर्ड कराई। पांच दिसंबर 2011 को उसकी कार घर से बाहर चोरी हो गई। कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। उसने कार चोरी की एफ आईआर दर्ज कराई। साथ ही बैंक, बीमा कंपनी, आरटीओ को भी पत्र लिखकर कार चोरी होने की सूचना दी। बीमा कंपनी से क्लेम का भुगतान करने की मांग की ।
उसका क्लेम अभी निर्णीत नहीं हुआ है। मगर इस बीच 16 सितंबर 2019 को बैंक में चार लाख 48 हजार रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की की गई। अधिवक्ताओं का कहना था कि यूपी पब्लिक मनी (रिकवरी एंड ड्यूज)1972 के प्रावधानों के तहत बैंक द्वारा की गई कार्यवाही गलत है।
कोर्ट ने शाखा प्रबंधक को तलब कर किया था। अदालत में हाजिर हुए सीनियर मैनेजर संतोष कुमार ने स्वीकार किया कि रिकवरी सर्टिफिकेट गलत जारी हो गया था, जिसे बैंक ने वापस ले लिया है। उन्होंने इस गलती के लिए अदालत में बिना शर्त माफी भी मांगी। कोर्ट ने माफी स्वीकार करते हुए शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार से कार्य न किया जाएं और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही पेश आएं।