नगर निगम के सफाई कर्मचारियों द्वारा कूड़ा एकत्र कर जला देने की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। घरेलू कूड़ा जलाने से पर्यावरण को पहुंचने वाले नुकसान को लेकर विधि छात्रों ने एक जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका मेें ठोस कचरा प्रबंधन, सफाई व्यवस्था और डोर टू डोर कूड़ा उठाने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया है। इस पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर नगर निगम के पास उपलब्ध कचरा प्रबंधन की जानकारी मांगी है।
विधि छात्र अनुभव वर्मा और अन्य द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि नगर निगम के पास ठोस कचरा प्रबंधन का पर्याप्त संसाधन नहीं है। सफाई कर्मचारी जगह-जगह पर कचरा एकत्र कर जला देते हैं, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता है। निगम द्वारा स्थापित ठोस अपशिष्ट निस्तारण संयंत्र बसवार की क्षमता अपर्याप्त है। खंडपीठ ने कचरा जलाए जाने पर नाराजगी जताते हुए निगम से बताने को कहा है कि उसके पास वार्ड वार कूड़ा एकत्र करने की क्या व्यवस्था है। कितने वार्डों से कूड़ा उठाया जा रहा है। एकत्र किए गए कचरे के निस्तारण का क्या इंतजाम है। निगम को कचरा जलाने पर रोक लगाने के लिए भी कहा है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।