इलाहाबाद हाईकोर्ट
शिवम द्वारा इस आशय का हलफनामा दिए जाने के बाद जब उसकी जांच कराई गई तो पता चला कि वह मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने के मामले मे उसके खिलाफ 28 जून 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी जिसमें उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 1 साल की सजा और ₹35000 का जुर्माना सुनाया था। अधिकारियों ने हलफनामे में गलत जानकारी दिए जाने के आधार पर उसकी नियुक्ति नियुक्ति नियुक्ति नियुक्ति रद्द कर उसे सेवा से बाहर कर दिया था ।
इस आदेश को को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई । एकल न्याय पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी याची ने मुकदमा दर्ज होने की जानकारी छिपाई है इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती है। एकल पीठ के फैसले को अपील में चुनौती दी गई । अपील पर सुनवाई करते हुए खंड पीठ ने कहा कि घटना के समय याची मात्र 16 साल का था ।जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है।