प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निषेधाज्ञा लागू रहने के बावजूद लॉक डाउन की अवधि में नगर निगम अलीगढ़ द्वारा याची को घर से बेदखल किए जाने को कोर्ट की अवमानना करार दिया है, साथ ही नगर निगम अलीगढ़ के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह याची को उसके मकान का कब्ज़ा वापस सौंपे और इसकी रिपोर्ट अगली तारीख को कोर्ट में दाखिल करें । कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो अदालत उनको अवमानना के आरोप में दंडित करेगी।
अलीगढ़ के गयूर अहमद की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी ने दिया है। याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय का कहना था कि याची ने सिविल लाइंस लाल डिग्गी के मलकह नगर में 252.40 स्क्वायर मीटर का प्लाट फ्रीहोल्ड कराया था, जिसे लेकर सिविल कोर्ट में विवाद चल रहा है । याची के पक्ष में अपर जिला जज ने निषेधाज्ञा आदेश पारित किया है। इस बीच लॉक डाउन हो जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने सामान्य आदेश जारी कर कहा है कि लॉकडाउन के दौरान सभी अदालतों द्वारा जारी अंतरिम आदेश लागू रहेंगे साथ ही कोर्ट ने इस अवधि में बेदखली आदि की कार्यवाही नहीं करने का भी निर्देश दिया है । इस आदेश के बावजूद 4 जून 2020 को नगर आयुक्त और उनके मातहत अधिकारी तथा कर्मचारी याची के घर पर पहुंचे और ताला तोड़कर मकान पर कब्जा कर लिया। याची उस समय सब्जी लेने घर से बाहर गया था। वापस लौटने पर उसने पाया कि उसके घर का सारा सामान सड़क पर फेंका हुआ है और मकान पर नगर निगम के अधिकारियों ने कब्जा कर लिया उसने अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी मगर उन्होंने उल्टे उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी दी ।
कोर्ट ने कहा की प्रथम दृष्टया यह मामला अदालत की अवमानना का है। नगर निगम अलीगढ़ को निर्देश दिया है की अगली तारीख 27 जुलाई से पूर्व वह अपनी गलती को सुधारें अन्यथा अदालत उनको अवमानना के आरोप में दंडित करेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।