अभी तक दावा अधिकरण की पीठ लखनऊ में बनाने का विरोध कर रहे हाईकोर्ट के वकीलों के सामने शिक्षा अधिकरण का मुद्दा एक बार फिर आ गया है। शिक्षा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में ही बनाने की जानकारी मिलने के बाद हाईकोर्ट बार ने इस मुद्दे पर फिर से सरकार से दो-दो हाथ करने की ठान ली है। मौजूदा स्थिति पर विचार करने के लिए सोमवार को पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है।
हाईकोर्ट बार के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने बताया कि भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्दार्थ नाथ सिंह से हाईकोर्ट के वकीलों को आश्वासन मिला था कि शिक्षा अधिकरण की प्रधानपीठ प्रयागराज में बनेगी। उन्होंने इसके लिए काफी प्रयास भी किया था। इसका अर्थ है कि मुख्यमंत्री ने अपने ही मंत्री की बात नहीं मानी। प्रभाशंकर का कहना है कि इस मामले में मैने जनहित याचिका दाखिल कर रखी है जो अभी लंबित है। पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय के नेेतृत्व में वकीलों ने लंबी लड़ाई लड़ी थी। उनको भी साथ लिया जाएगा। लंबित जनहित याचिका में जल्दी सुनवाई का प्रार्थनापत्र देकर सुनवाई की मांग की जाएगी।
शिक्षा अधिकरण को लेकर महीनों लड़ाई लड़ने के बाद वकीलों को सरकार की ओर से आश्वासन मिला था कि इसकी प्रधानपीठ की स्थापना प्रयागराज में ही होगी। मगर अचानक कैबिनेट में पास प्रस्ताव से पता चला कि सरकार अधिकरण की मुख्यपीठ लखनऊ में और प्रयागराज में सिर्फ बेंच बनाने जा रही है जो सिर्फ सप्ताह में दो दिन काम करेगी। इससे हाईकोर्ट के वकीलों को गहरा झटका लगा है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर वकीलों की ओर जमकर पोस्ट किए जा रहे हैं।
वहीं उ प्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय एवं कानून के खिलाफ जाकर शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने की कडी निंदा की है। एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार तिवारी ने की। संचालन सचिव जी.पी. सिंह ने किया।एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से नौकरशाही के दबाव में आकर कानून व सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के विपरीत, शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है।