कोर्ट ने कहा कि लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर दावा खारिज किया गया, जो बिना समुचित जांच के तैयार की गई थी। न तो ग्रामीणों के बयान लिए गए और न ही यह रिपोर्ट याचिकाकर्ता को दी गई। इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पति ने वही जमीन 2011 में ट्रैक्टर खरीदते समय बैंक के पास गिरवी रखी थी। अधिकारियों को इसकी ठीक से जांच करनी चाहिए थी न कि याचिकाकर्ता के दावे को लापरवाही से खारिज कर देना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं की उदार और उद्देश्यपूर्ण व्याख्या की जानी चाहिए, ताकि उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और तकनीकी आधार पर उन्हें वंचित न किया जाए। कोर्ट ने कन्नौज के डीएम के 25 अगस्त 2021 को पारित आदेश और 31 जुलाई 2021 के सूचना आदेश को निरस्त कर कहा कि वह याचिकाकर्ता के दावे पर कानून के अनुसार पुनः विचार करें। याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दें और आवश्यक हो तो समुचित जांच कर आठ सप्ताह में निर्णय लें।
क्या है मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना?
यूपी सरकार की ओर से 2020 में शुरू की गई मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना में मारे जाने वाले किसानों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसान की मौत होने पर उसके आश्रितों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलती है।