इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीडि़त कैदी की समय पूर्व रिहाई के मामले में ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई है। कहा है कि अपर मुख्य सचिव (गृह) 16 अप्रैल तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि इस पर अब तक क्या निर्णय लिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीडि़त कैदी की समय पूर्व रिहाई के मामले में ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई है। कहा है कि अपर मुख्य सचिव (गृह) 16 अप्रैल तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि इस पर अब तक क्या निर्णय लिया गया।
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न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने चेतावनी भी दी है कि अगली सुनवाई तक हलफनामा पेश नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा। जौनपुर निवासी याची बाबा यादव को 1982 की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बाबा जीभ के कैंसर से पीड़ित है। इसी आधार पर उसने समय पूर्व रिहाई को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने का निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की रिहाई पर अब तक क्या निर्णय लिया गया है। निर्धारित तिथि पर मामला पेश होने पर जब अदालत को पता चला कि शासन की ओर से कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है तो इसे गंभीरता से लिया।