पिता ने उचित शिक्षा, सुरक्षित वातावरण का भी दिया था आश्वासन
कोर्ट ने कहा कि बच्चों का लंबे समय से मां और नाना के साथ रहना उनके भावनात्मक जुड़ाव का आधार है। कोर्ट के समक्ष बच्चों का मां और नाना की गोद से हटने में झिझकना पिता को अस्वीकार करना नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर पाया कि पिता के पास बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण,विकास के लिए पर्याप्त आर्थिक साधन और आवासीय व्यवस्था है। पिता ने बच्चों को उचित शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया था। ऐसे में कोर्ट ने दोनों बच्चों की अभिरक्षा पिता को सौंप दी।
मां वीडियो कॉल व रविवार को मिल सकेगी
कोर्ट ने मां के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उसे प्रत्येक रविवार दोपहर दो से शाम छह बजे तक बच्चों से मिलने और प्रतिदिन शाम छह से रात नौ बजे तक वीडियो कॉल के जरिये बातचीत का अधिकार दिया है।