डीएम ललितपुर ने खारि कर दी थी अर्जी
सीनियर सिटीजन एक्ट की धारा-22 और 23 के तहत दिए गए उसके प्रत्यावेदनों पर कार्रवाई नहीं हुई। ललितपुर के डीएम ने 23 जून को बेटी-दामाद को मकान से बेदखल करने की मांग खारिज कर दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम की धारा 23(1) तभी लागू होती है जब संपत्ति का वैध हस्तांतरण इस शर्त पर किया गया हो कि हस्तांतरण पाने वाला सीनियर सिटीजन की मूलभूत जरूरतों और शारीरिक आवश्यकताओं की देखभाल करेगा और बाद में उस शर्त का उल्लंघन न हो।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि वरिष्ठ नागरिक का कहना है कि दान विलेख वास्तव में बनाया ही नहीं गया और धोखाधड़ी, दबाव, अनुचित प्रभाव या जालसाजी से तैयार किया गया है तो उस दस्तावेज को रद्द करने का अधिकार सामान्य दीवानी क्षेत्राधिकार वाले सिविल कोर्ट को है। सीनियर सिटीजन के कहने पर उस दस्तावेज को शून्य घोषित करने का अधिकार न्यायाधिकरण को नहीं है।
कोर्ट ने फर्जीवाड़े के आरोप की जांच के लिए समितियां गठित करने पर डीएम की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट सूबे के सभी जिलाधिकारियों और उप जिलाधिकारियाें को आगाह किया कि सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का ही पालन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि सामान्य दीवानी न्यायालय के क्षेत्राधिकार का प्रयोग डीएम या प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर सकते। दान विलेख को चुनौती देने का मामला सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कार्यवाही के दायरे से पूरी तरह बाहर है।