हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि परीक्षा नियम पुनर्मूल्यांकन की अनुमति नहीं देते तो न्यायालय इसे निर्देशित नहीं कर सकता, जब तक कि कोई गंभीर त्रुटि स्पष्ट रूप से न दिखाई दे। कोर्ट ने कहा कि याची का तर्क था कि उसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उसे हिंदी में 90 और जीव विज्ञान में 96 अंकों की उम्मीद थी। कोर्ट ने कहा कि केवल छात्र की उम्मीद के आधार पर पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता।