इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर सकते हैं और न ही सील की कार्रवाई। इसका कानूनी तौर पर अधिकार जिला पंजीकरण प्राधिकरण के पास है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर सकते हैं और न ही सील की कार्रवाई। इसका कानूनी तौर पर अधिकार जिला पंजीकरण प्राधिकरण के पास है। इसी टिप्पणी संग कुशीनगर स्थित खुशी अस्पताल व अन्य की याचिका पर सीएमओ के आदेश को रद्द कर दिया।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है। मामले में अस्पताल प्रबंधन ने 10 मार्च 2026 के सीलिंग और 18 मार्च 2026 के पंजीकरण निरस्तीकरण आदेश को चुनौती दी थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट-2010 की धारा-10 और 32 के तहत पंजीकरण निरस्त करने की शक्ति केवल जिला पंजीकरण प्राधिकरण के पास है।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शासनादेश के जरिये 30 बेड तक के अस्पतालों के मामले में सीएमओ को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी शासनादेश के माध्यम से अधिनियम में दी गई वैधानिक शक्तियों का विस्तार नहीं किया जा सकता। अधिनियम के तहत गठित प्राधिकरण के अतिरिक्त किसी अन्य अधिकारी को पंजीकरण निरस्त करने की शक्ति प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण निरस्त करने से पहले अस्पताल को तीन माह का नोटिस देना अनिवार्य है।