इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भर्ती मामले में अनुभव की अनिवार्य शैक्षिक योग्यता की व्याख्या को लेकर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भर्ती मामले में अनुभव की अनिवार्य शैक्षिक योग्यता की व्याख्या को लेकर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया है। कहा है कि दी गई व्याख्या अस्पष्ट है और विज्ञापन की मूल शर्तों से मेल नहीं खाती। यह सवाल न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने गीता चंद्रा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते किया है।
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आयोग की ओर से 19 जून 2025 को एक सरकारी संचार प्रति कोर्ट में पेश की गई, जिसमें राजकीय कार्यालय और विश्वविद्यालय या शिक्षा संस्थान की व्याख्या दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण अस्पष्ट है और प्रारंभिक विज्ञापन में इसका उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि राज्य विश्वविद्यालय, अधिनियम से स्थापित विवि और निजी विवि के बीच अनुभव के मामले में अंतर किस आधार पर किया जा रहा है। साथ ही अकाउंट्स रूल्स का भी स्पष्ट विवरण विज्ञापन में नहीं दिया गया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 16 मार्च को अगली तिथि पर सरकार के संयुक्त सचिव और यूपीपीएससी के सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। साथ ही आयोग के अधिवक्ता याचिका और उससे संबंधित मामलों में काउंटर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।