इलाहाबाद ने तथ्यों को छिपाने और अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने कृष्णा बिहारी यादव की खारिज करते हुए दिया है।
प्रयागराज निवासी कृष्णा बिहारी यादव ने ट्रायल कोर्ट में प्रतिवादियों के खिलाफ चोट पहुंचाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, धमकी देने आदि के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग में याचिका दायर की थी। बाद में याची ने अदालत में आवेदन देकर याचिका वापस लेने की प्रार्थना की। कहा, मामले से जुड़ी संबंधित अदालत में याचिका दाखिल नहीं कर पाया था। इस पर ट्रायल कोर्ट ने 30 अगस्त 2025 को याचिका को खारिज कर दी थी। इसी आदेश को आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं ही ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर यह स्वीकार किया था कि उसने गलती से गलत अदालत में याचिका दायर कर दी है। उसने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने पाया कि याची ने इस याचिका में दो नए व्यक्तियों (भोला यादव और अवधेश कुमार यादव) को प्रतिवादी बना दिया, जो मूल शिकायत में पक्षकार ही नहीं थे।
30 अगस्त 2025 के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने उसी कारण के लिए एक और याचिका दायर की थी, जिसे 5 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया गया था। वर्तमान याचिका में इस महत्वपूर्ण तथ्य का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। तथ्य छुपाए जाने से नाराज कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया।