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यूपी : हाईकोर्ट का कड़ा रुख- युवक को पेश नहीं करने पर एसएसपी मेरठ को 45 मिनट कोर्ट में होना पड़ा खड़ा

Sun, 25 Oct 2026 06:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

शादी का वादा कर जमानत हासिल करने और बाद में मुकरने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने आरोपी की जमानत रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। गैर जमानती वारंट के बावजूद आरोपी को पेश नहीं कराने पर मेरठ के एसएसपी को करीब 45 मिनट तक अदालत में खड़ा रहना पड़ा। कोर्ट ने सीजेएम के आचरण पर भी नाराजगी जताई।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का वादा कर जमानत हासिल करने और बाद में इससे मुकरने के मामले में आरोपी की जमानत रद्द कर दी। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। वहीं, गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी को अदालत में पेश नहीं कराने पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बीबीजीटीएस मूर्ति को करीब 45 मिनट तक अदालत में खड़ा रखा।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ कर रही थी। एसएसपी ने अदालत को बताया कि संबंधित अवधि में वह अवकाश पर थे और उनके अधीनस्थ पुलिसकर्मियों से चूक हुई। कोर्ट ने उन्हें भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी। अदालत ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आचरण पर भी गंभीर नाराजगी जताई। पीठ ने इसे घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए आदेश की प्रति मेरठ के प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य सीजेएम के खिलाफ संभावित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार करना है।

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शादी का आश्वासन देकर ली थी जमानत

मामला मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है। आरोप है कि नितीश उर्फ सिद्धांत उर्फ सेठी ने एक युवती को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत की मांग करते समय युवती से शादी करने का आश्वासन दिया था। इस आधार पर हाईकोर्ट ने 18 मार्च को उसे जमानत दे दी थी। इसके बावजूद युवक ने पीड़िता से शादी नहीं की। पीड़िता ने युवक की जमानत निरस्त करने की अर्जी दाखिल की।

हाईकोर्ट के बजाय सीजेएम की अदालत में पेश किया

गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने के बजाय मेरठ के सीजेएम की अदालत में ले गई। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया । एसएसपी मेरठ को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।

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एसएसपी ने कहा- छुट्टी पर था, अधीनस्थों से हुई चूक

सुनवाई के दौरान एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने अदालत को बताया कि वह 28 सितंबर से दो अक्तूबर तक अवकाश पर थे। उनके अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों से आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने के मामले में चूक हुई है।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैर जमानती वारंट के निष्पादन की जिम्मेदारी एसएसपी की थी। इसलिए आरोपी को हाईकोर्ट में पेश कराना भी उनकी जिम्मेदारी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित करने के बजाय उन्हें शाम चार बजे तक अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया और भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी।

सीजेएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति भेजने का निर्देश

हाईकोर्ट ने सीजेएम मेरठ के आचरण पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि सीजेएम को जानकारी थी कि हाईकोर्ट ने आरोपी को सीधे पेश करने के लिए गैर जमानती वारंट जारी किया है। इसके बावजूद आरोपी को हाईकोर्ट में पेश कराने के बजाय सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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