प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर मध्य रेलवे, सूबेदारगंज, प्रयागराज की ओर से राज्य उपभोक्ता आयोग के 11 हजार रुपये के मुआवजे और वाद खर्च के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आश्चर्य व्यक्त किया है। कहा कि वकीलों की फीस और अन्य खर्च मुआवजे की राशि से कहीं अधिक है। कोर्ट ने नई दिल्ली स्थित रेलवे की लीगल सेल के वरिष्ठ अधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा और खर्च का ब्योरा मांगा है। यही नहीं कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उस अधिकारी से खर्च की वसूली की जाए जिसकी सलाह पर यह याचिका दायर की गई है।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने भारत संघ बनाम विजय कुमार मालवीय की याचिका पर सुनवाई के दाैरान हैरानी जताई। दरअसल, मामला 2008 से चल रहा है। विपक्षी वादी ने ट्रेन लेट होने से माल की आपूर्ति में हुए नुकसान के लिए जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। फोरम ने 25 हजार रुपये मुआवजा और दो हजार रुपये वाद खर्च का आदेश दिया जिसे बाद में राज्य आयोग ने 10 हजार रुपये मुआवजा और एक हजार खर्च (कुल 11हजार) कर दिया। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद रेलवे ने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने पूछा है कि इतनी छोटी रकम के लिए हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की गई। साथ ही जिला उपभोक्ता फोरम से हाईकोर्ट तक मुकदमेबाजी में रेलवे और भारत सरकार की ओर से अब तक किए गए कुल खर्च का ब्योरा भी तलब किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्यों न उस अधिकारी से खर्च की वसूली की जाए जिसकी सलाह पर यह याचिका दायर की गई है।