चार जून को थाने से निकला, सात जून को हुआ हादसा
सुनवाई के दौरान सामने आया कि जब्त वाहन को चार जून 2021 को रामघाट थाने से बाहर निकाला गया था। राज्य की ओर से बताया गया कि तत्कालीन हेड मुहर्रिर सीताराम ने दो सिपाहियों पंकज राणा और नरेंद्र सिंह को वांछित आरोपी की तलाश के लिए वाहन दिया था। दावा किया गया कि यह तत्कालीन थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह की जानकारी के बिना हुआ। तीन दिन बाद वाहन मथुरा के राया थाना क्षेत्र में हादसे का शिकार हो गया। हादसे में मनोज कुमार के माता-पिता गंभीर रूप से घायल हुए। बाद में उनकी मां की मौत हो गई। मामले में एफआईआर दर्ज हुई और वाहन फिर जब्त कर लिया गया।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हेड मुहर्रिर और दोनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर सेवा अभिलेख में निंदा प्रविष्टि की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि यदि जब्त वाहन को बिना वैध अधिकार के बाहर निकाला गया था तो यह केवल प्रक्रिया संबंधी चूक नहीं, बल्कि सौंपी गई हिरासत के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है। लिहाजा, डीजीपी मामले की स्वतंत्र और गोपनीय जांच करवाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डीजीपी की जांच में यह भी देखा जाएगा कि वाहन को थाने से कैसे निकाला गया, संबंधित पुलिसकर्मियों और तत्कालीन थाना प्रभारी की क्या भूमिका थी, तत्कालीन एसएसपी की भूमिका क्या रही तथा विभागीय कार्रवाई निष्पक्ष और पर्याप्त थी या नहीं। यह भी जांच होगी कि घटनाक्रम से किसी आपराधिक अपराध का प्रथम दृष्टया पता चलता है या नहीं।