कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य है। ऐसे में शिक्षकों का समायोजन छात्रों के हित में आवश्यक कदम है। कोर्ट ने यह भी माना कि नीति निर्माण और उसका क्रियान्वयन कार्यपालिका का विशेष अधिकार क्षेत्र है। जब तक कोई नीति मनमानी, भेदभावपूर्ण या कानून के विपरीत न हो, तब तक न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
शिक्षकों की शिकायतों का भी कोर्ट ने रखा ख्याल
कोर्ट ने कहा कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता या मानकों को लेकर आपत्तियां हैं तो प्रभावित शिक्षक एक सप्ताह में जिला समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। डीएम की अध्यक्षता में गठित समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षकों की आपत्तियों की सुनवाई कर एक महीने में तर्कसंगत निर्णय लें। साथ ही अधिकारियों को यू डायस प्लस पोर्टल पर शिक्षकों व छात्रों का सही डाटा अपडेट करने का निर्देश दिया है।