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High Court : व्यक्तिगत सुविधाओं के बजाय छात्र हित सर्वोपरि, तबादले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज

Wed, 18 Feb 2026 12:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अनिवार्य शिक्षा मिल सके, इसके लिए छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना राज्य की वैधानिक जिम्मेदारी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अनिवार्य शिक्षा मिल सके, इसके लिए छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना राज्य की वैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में शिक्षक की व्यक्तिगत सुविधाओं के बजाय छात्र हित सर्वोपरि है। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रदेश सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए जारी 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को बरकरार रखते हुए पांच याचिकाएं निस्तारित कर दीं।

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चित्रकूट से अरुण प्रताप सिंह समेत 38, मिर्जापुर से संगीता सिंह समेत 43, मैनपुरी से स्वदेश कुमार समेत 58, गोरखपुर से अभिषेक कुमार त्रिपाठी समेत 12, जालौन से अमनराज समेत छह शिक्षकों ने शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर जारी शासनादेश मनमाना है। इसमें स्थानांतरण की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं बताई गई है।

जुलाई के बजाय बीच सत्र नवंबर में शिक्षकों के समायोजन से पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही अलग-अलग जिलों में अलग मानदंड अपनाए गए हैं। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि जिन विद्यालयों में शिक्षक कम या नहीं हैं, वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में सेवा शर्ताें के तहत समायोजन जरूरी है।

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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य है। ऐसे में शिक्षकों का समायोजन छात्रों के हित में आवश्यक कदम है। कोर्ट ने यह भी माना कि नीति निर्माण और उसका क्रियान्वयन कार्यपालिका का विशेष अधिकार क्षेत्र है। जब तक कोई नीति मनमानी, भेदभावपूर्ण या कानून के विपरीत न हो, तब तक न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।

शिक्षकों की शिकायतों का भी कोर्ट ने रखा ख्याल

कोर्ट ने कहा कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता या मानकों को लेकर आपत्तियां हैं तो प्रभावित शिक्षक एक सप्ताह में जिला समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। डीएम की अध्यक्षता में गठित समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षकों की आपत्तियों की सुनवाई कर एक महीने में तर्कसंगत निर्णय लें। साथ ही अधिकारियों को यू डायस प्लस पोर्टल पर शिक्षकों व छात्रों का सही डाटा अपडेट करने का निर्देश दिया है।

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