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High Court : केंद्रीय मंत्री के नाम से पहले माननीय या श्रीमान न लिखने पर हाईकोर्ट सख्त, एसीएस गृह से मांगा जवा

Sat, 04 Apr 2026 06:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम से पहले माननीय या श्रीमान न लिखने पर जवाब मांगा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम से पहले माननीय या श्रीमान न लिखने पर जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मथुरा निवासी हर्षित शर्मा और अन्य की याचिका पर दिया है। मथुरा निवासी याचियों पर धमकी और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों में एफआईआर दर्ज है।

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याचियों ने एफआईआर रद्द करने की मांग में याचिका दायर की है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एफआईआर में केंद्रीय मंत्री का नाम दर्ज है। एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानजनक उपाधि नहीं लगाई गई। इसपर कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अपने हलफनामे में यह स्पष्ट करें कि एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे माननीय क्यों नहीं लगाया गया है।

एक जगह तो उनके नाम के आगे श्रीमान भी नहीं जोड़ा गया है। यदि लिखित रिपोर्ट में शिकायतकर्ता ने माननीय मंत्री जी का अनुचित तरीके से वर्णन किया है तो एफआईआर लिखते समय पुलिस का यह कर्तव्य था कि वह प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सम्मानजनक उपाधि का प्रयोग करे।

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