इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों को खाली कराने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सोमवार को एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान कानून तोड़ने वाले छात्रों से सख्ती से निपटने के लिए कहा है। साथ ही प्रशासन से हॉस्टलों को खाली कराने के मामले में कार्ययोजना तलब की है। कोर्ट ने डीएम, एसएसपी को निर्देश दिया है कि वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर हॉस्टलों को खाली कराएं। उल्लेखनीय है कि छात्र हॉस्टल खाली कराने के विरोध में आंदोलित हैं।
कोर्ट ने सोमवार को यह साफ कर दिया कि अवैध छात्रों को निकालने के मामले में अदालत नरमी नहीं बरतेगी। छात्र धर्मवीर सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की पीठ सुनवाई कर रही है। छात्रों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने कहा कि तमाम छात्रों की परीक्षाएं चल रही हैं। उनको हॉस्टल से बाहर निकालने की स्थिति में समर हॉस्टल की व्यवस्था की जाए ताकि पढ़ाई में बाधा न पहुंचे। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता यूएन शर्मा का कहना था कि हॉस्टल खाली कराने में पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। छात्र हॉस्टल खाली कराने का विरोध कर रहे हैं, उनसे विश्वविद्यालय के अधिकारियों को सुरक्षा का खतरा है।
उधर, परिसर में आंदोलित छात्रों ने सोमवार से हॉस्टल वाश आउट के खिलाफ क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। इस दौरान नारेबाजी करते हुए छात्रों ने कुलपति कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर विरोध जताया। छात्र इस मुद्दे पर आरपार की लड़ाई का एलान कर चुके हैं। कोर्ट ने डीएम और एसएसपी को निर्देश दिया है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अधिकारी अपने दायित्व का पालन करें। कोर्ट ने हॉस्टल खाली कराने की कार्ययोजना 20 अप्रैल को पेश करने का निर्देश दिया है।