इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी के सह-कर्मचारी के साथ निजी बातचीत के आधार पर किए निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही विपक्षी पक्षों (राज्य सरकार) को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं याची को दो सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने शिवेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर दिया है।
आगरा निवासी याची पशुपालन विभाग में कार्यरत था। एक सह-कर्मचारी की पत्नी ने याची और सह-कर्मचारी के बीच हुई निजी बातचीत की रिकॉर्डिंग के आधार पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत पर अपर निदेशक (ग्रेड द्वितीय) की ओर से चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। इसी बीच, राज्य सरकार के निर्देश पर निदेशक प्रशासन ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कार्रवाई करते हुए याचिकाकर्ता को निलंबित कर दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची अधिवक्ता विभु राय ने दलील दिया कि यह बातचीत निजी थी और सार्वजनिक नहीं थी। कोर्ट ने मामले पर विचार की आवश्यकता मानते हुए विपक्षी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 30 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक रहेगी। हालांकि याची के खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।