इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबार में निवेश की रकम को लेकर दर्ज मुकदमे में आरोपियों को राहत देते हुए आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में विपक्षी शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबार में निवेश की रकम को लेकर दर्ज मुकदमे में आरोपियों को राहत देते हुए आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में विपक्षी शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने फैज खान और दो अन्य की याचिका पर दिया है।
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अलीगढ़ के क्वार्सी थाने में याचियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोप में एफआईआर दर्ज है। ट्रायल कोर्ट नौ अप्रैल 2026 के संज्ञान एवं समन आदेश जारी किया था। याचियों ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग में याचिका दायर की है। याची अधिवक्ता यावर मुख्तार ने दलील दी कि एफआईआर में लगाए गए आरोप निराधार हैं और याचियों को परेशान करने के उद्देश्य से मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता ने याचियों के रियल एस्टेट कारोबार में अलग-अलग तारीखों पर लाभ कमाने के उद्देश्य से रकम निवेश की थी।
विवाद मूल रूप से निवेश की रकम की वसूली से जुड़ा दीवानी विवाद है। रकम की वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दाखिल करने के बजाय आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए विपक्षी शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक संबंधित आपराधिक मुकदमे की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।