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प्रेम विवाह करने वालों को सुरक्षा देने पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

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High court sought information on giving protection to love marriage
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अपनी पसंद से अंतर जातीय या अंतर धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों की सुरक्षा के लिए 31 अगस्त 19 के शासनादेश के तहत कार्यवाही की जा रही है या नहीं। शासनादेश के तहत ऐसे जोड़ों को एक माह से लेकर अधिकतम एक साल तक सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपी गई है। अपनी पसंद से विवाह करने वाले बड़ी संख्या में जोड़े सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल करते हैं। उनकी शिकायत होती है कि परिवार वाले शादी के खिलाफ हैं जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा है।
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अमरोहा के इसी प्रकार के एक मामले में सरोज और भूपेंद्र सिंह ने सुरक्षा की गुहार में दाखिल याचिका में पुलिस पर सुरक्षा मुहैया न कराने का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने राज्य सरकार के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय से शासनादेश के तहत याची की सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की 30 सितंबर तक जानकारी मांगी है। कोर्ट का मानना है कि जब राज्य सरकार ने 31 अगस्त के शासनादेश में घर वालों की मर्जी के विरुद्ध अपनी पसंद से शादी करने वाले बालिग जोड़ों को पुलिस सुरक्षा देने की व्यवस्था की है तो पुलिस इसका पालन क्यों नहीं कर रही है। पुलिस के सुरक्षा मुहैया न कराने से लोगों को हाईकोर्ट आना पड़ रहा है।
खतरे की जांच करेंगे मजिस्ट्रेट
शासनादेश में ऐसा विवाह करने वालों के परिवार की भी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। सभी को सुरक्षित घरों में रखने को कहा गया है और कहा गया है कि जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक भय या खतरे की एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट दें। साथ ही खतरा पैदा करने वालों पर आपराधिक अभियोग की कार्यवाही की जाए।
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शासनादेश में सरकार ने हर जिले में विशेष प्रकोष्ठ गठित किया है। जिसमें सुरक्षा की मांग की जा सकेगी। जो उस पर कार्यवाही करेगी। ऑनर किलिंग और शादी करने वाले ऐसे जोड़ों के विरुद्ध हिंसा के अपराध की फास्ट ट्रैक कोर्ट में छह माह में सुनवाई पूरी की जाएगी।
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