इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर में 43 साल पहले पिता पर तेजाब फेंकने के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई तीन साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर में 43 साल पहले पिता पर तेजाब फेंकने के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई तीन साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण कर शेष सजा काटने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने रज्जाक की याचिका पर दिया।
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अभियोजन के अनुसार पांच सितंबर 1981 को गोरखपुर के बिछिया गांव में रज्जाक का अपने पिता गुलाम हुसैन से विवाद हुआ था। इसी दौरान उसने पिता पर तेजाब फेंक दिया। इससे उनके शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया। करीब तीन सप्ताह तक इलाज के बाद सेप्टीसीमिया और गंभीर जलन के कारण उनकी मृत्यु हो गई। ट्रायल कोर्ट ने 1983 में हत्या के आरोप की सुनवाई के बाद उसे चोट पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।