इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कैंडिडेट रिस्पांस लॉग (सीआरएल) रिपोर्ट में कम समय में अधिक प्रश्न हल करने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नकल करने वाला नहीं माना जा सकता। इसके लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कैंडिडेट रिस्पांस लॉग (सीआरएल) रिपोर्ट में कम समय में अधिक प्रश्न हल करने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नकल करने वाला नहीं माना जा सकता। इसके लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने सरकार को तीन माह में शेष चयन प्रक्रिया पूरी कर परिणाम घोषित करने का आदेश दिया है। हालांकि, निष्पक्ष जांच करने की सरकार को स्वतंत्रता दी गई है। मामला तनु चौधरी और 44 अन्य अभ्यर्थियों से जुड़ा है।
दरोगा भर्ती 2020-21 में नकल का आरोप लगाकर याची अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा से रोक दिया गया था। याचियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकल पीठ ने 29 अगस्त 2025 को उनकी याचिकाएं स्वीकार कर राहत दी थी। इसके खिलाफ सरकार ने विशेष अपील की थी। भर्ती में उपनिरीक्षक, पीएसी प्लाटून कमांडर और फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर के 9534 पद शामिल थे।