लॉ बुक यूनिवर्सल पब्लिशर को भ्रमित प्रकाशन के लिए कारण बताओ नोटिस
सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा चार (बी) में किए गए संशोधन को पुस्तक में न शामिल करने पर कोर्ट ने की कार्रवाई
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूनिवर्सल पब्लिशर लेक्सिस-नेक्सिस डीएलएफ साइबर सिटी फेज-2 गुड़गांव, हरियाणा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न बार सदस्यों को किताब में अधूरा प्रकाशन कर भ्रमित करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने आर्या विद्या सभा बुधना मुजफ्फरनगर व अन्य की विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
सुनवाई केदौरान कोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 की धारा चार (बी) जोड़ा है। जिसके तहत सोसायटी की सामान्य सभा सदस्य विवाद को धारा 25 में संदर्भित किया जा सकता है। सहायक निबंधक स्वतंत्र रूप से तय नहीं कर सकता। इसकी व्यवस्था दी गई है। कोर्ट में पब्लिशर कंपनी का वेयर एक्ट जो 2020 में प्रकाशित किया गया है, उसमें धारा चार (बी) नहीं छापा गया है। जबकि 2013 में ही संशोधन कानून पारित हो चुका है। कोर्ट को दूसरी पब्लिकेशन की किताबें मंगाकर देखने में समय बर्बाद करना पड़ा कि उनमें भी छपा है या नहीं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि धारा चार (बी) प्रकाशित न कर कंपनी ने बार सदस्यों को भ्रमित किया है। प्रकाशक कंपनी को 12 अप्रैल तक सफाई देने का निर्देश दिया गया है।