इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने नई कर व्यवस्था में न्यायिक भत्तों पर आयकर छूट नहीं मिलने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने याचिका पर भारत सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
न्यायमूर्ति जैन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नया टैक्स सिस्टम चुनने के बाद हाईकोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22डी के तहत मिलने वाले न्यायिक भत्तों पर 9.85 लाख रुपये की आयकर छूट मांगी थी। उनका कहना है कि यह प्रावधान सरकारी आवास, आवागमन, सत्कार भत्ता और लीव ट्रैवल कंसेशन जैसी सुविधाओं को आयकर से छूट देता है।
हालांकि, आयकर पोर्टल ने नए टैक्स सिस्टम में इस छूट का दावा स्वीकार नहीं किया। प्रत्यावेदन पर उन्हें 12 सितंबर 2025 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए बताया गया कि नई कर व्यवस्था में ऐसी छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता। क्योंकि, इससे दोहरा फायदा होगा।