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इलाहाबाद के एसटीपी पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Fri, 24 Mar 2017 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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गूल से पहुंचाया जल - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश जल संस्थान से पूछा है कि इलाहाबाद सहित जिन 26 जिलों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं उन जिलों में कितने नाले ऐसे हैं जिनका पानी सीधे गंगा में जा रहा है और कितने नालों को बंद कर दिया गया है। जो नाले अब तक बंद नहीं किए जा सके हैं उनको कब तक बंद किया जाएगा।
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गंगा प्रदूषण को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने  इलाहाबाद, कानपुर और वाराणसी के बारे में विशेष रूप से जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वाराणसी के 129 उद्योगों को नोटिस जारी किया जाए जो गंगा में प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। इन उद्योगों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के गंगा में किस प्रकार से जा रहा है। कोर्ट को बताया गया कि सूबे में 701 ऐसे उद्योग हैं जो गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं। अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और न्यायमित्र अरुण गुप्ता ने अदालत को गंगा में प्रदूषण की स्थिति पर रिपोर्ट दी।

इससे पूर्व कोर्ट ने पूछा था कि कुल कितने एसटीपी काम कर रहे हैं और उनकी शोधन क्षमता कितनी है। इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रदूषण की रोकथाम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। याचिका पर 13 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।
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याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने कोर्ट के समक्ष गंगा में सीधे गिर रहे नालों के फोटोग्राफ और रिपोर्ट रखी। बताया कि कीडगंज नाला, घाघर नाला, चाचर नाला, सलोरी नाला तथा राजापुर एसटीपी के बगल स्थित नाला सीधे गंगा में गिर रहा है। इसके अलावा सीवर लाइन को अभी तक एसटीपी से अब तक नहीं जोड़ा गया है। इसके अलावा पुराने यमुनापुल से एक पाइप नैनी की ओर ले जाना था, जिसे अब तक नहीं लगाया है इससे नैनी एसटीपी तक नाले का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना था कि जो भी एसटीपी बने हैं वह मानक के अनुरूप नहीं हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पीडब्ल्यूडी और गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर प्रदूषण की मौजूदा स्थिति की जानकारी देने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि कितने एमएलडी गैर शोधित और कितना शोधित जल गंगा में जा रहा है।
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