इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी जिलाधिकारियों से 24 अगस्त 2021 के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। इस आदेश में सभी जिलाधिकारियों को सरफेसी (वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं प्रतिभूति हितों का प्रवर्तन) कानून की धारा 14 के अंतर्गत विचाराधीन अर्जियों को 30 दिन में निर्णीत करने का आदेश दिया है। इसके अनुपालन में सचिव, राजस्व ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा था कि जिलाधिकारी धारा 14 की अर्जियों का रजिस्टर रखेंगे और उसकी मानीटरिंग करेंगे। 30 दिन के भीतर अर्जियों को निस्तारित कराएंगे, जिसका पालन नहीं किया जा रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा की याचिका पर दिया है।
इससे पहले कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेष अभियान चलाकर अर्जियों को निस्तारित करने का आदेश दिया गया है। जिलाधिकारी महाराजगंज ने बताया याची की अर्जी एडीएम वित्त के समक्ष है। कोर्ट ने चार किस्तों में बकाया जमा करने का निर्देश दिया है। एक किस्त जमा भी की गई है।
इस पर बैंक ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के बाद याचिका अर्थहीन हो चुकी है। मगर जिलाधिकारी रजिस्टर बनाकर मानीटरिंग नहीं कर रहे हैं। जिस पर कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश को गंभीरता से लेने तथा पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
क्या है सरफेसी कानून
सरफेसी अधिनियम एक ऐसा कानून है जो भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उनके न चुकाए गए ऋण की वसूली के लिए आवासीय अथवा वाणिज्यिक संपत्तियों को नीलाम करने की शक्ति प्रदान करता है।