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UP : हाईकोर्ट ने कहा- घायल का समय से इलाज जरूरी, एफआईआर नहीं

Sun, 08 Feb 2026 02:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिश्तेदार की गवाही झूठी नहीं, नैसर्गिक होती है। भाई पर जानलेवा हमले के बाद इलाज प्राथमिकता होती है, एफआईआर नहीं। लिहाजा, रिश्तेदार की गवाही की विश्वसनीयता और एफआईआर में देरी पर उठे सवाल निराधार हैं।
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कोर्ट का आदेश  - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिश्तेदार की गवाही झूठी नहीं, नैसर्गिक होती है। भाई पर जानलेवा हमले के बाद इलाज प्राथमिकता होती है, एफआईआर नहीं। लिहाजा, रिश्तेदार की गवाही की विश्वसनीयता और एफआईआर में देरी पर उठे सवाल निराधार हैं। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सीडी सिंह और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने कासगंज पेट्रोल पंप के मैनेजर के हत्याकांड में उम्रकैद पाए गुड्डू की आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश पर मुहर लगाते हुए अपीलार्थी को मिली सजा बरकरार रखी।

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मामला कासगंज का है। 20 दिसंबर 2010 की शाम मां गंगा पेट्रोल पंप के मैनेजर वाजिद हसन से पांच हजार रुपये की रंगदारी की मांग को लेकर विवाद में गुड्डू ने गोली मार दी थी। उस वक्त मैनेजर के भाई मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद अस्पताल ले जाते वक्त मैनेजर ने दम तोड़ दिया। इसके बाद भाई की तहरीर पर गुड्डू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना के बाद पुलिस ने ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट ने 2015 में गुड्डू को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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