आवेदक के अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र में जिन 22 आरोपियों को आरोपी बनाया गया था, उन्हें 15 मई 1997 के आदेश से मुकदमे का सामना करने के बाद बरी कर दिया गया है। इसलिए आवेदक पर की गई कार्यवाही भी रद्द की जा सकती है। शासकीय अधिवक्ता ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए तर्क दिया कि इस आवेदन के माध्यम से आवेदक की ओर से मांगी गई राहत खारिज करने योग्य है।
कोर्ट ने आवेदक की अर्जी खारिज कर दी। साथ ही रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि इसकी आदेश की कॉपी प्रमुख सचिव, यूपी विधान सभा के अध्यक्ष को भेजा जाए। साथ ही कहा कि पुलिस महानिदेशक विधायक रफीक अंसारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी किए गए गैर जमानती वारंट का तामीला सुनिश्चित करेंगे।