सपा सरकार ने दिया था लोकतंत्र सेनानी का दर्जा
2016 में अखिलेश सरकार ने मीसा बंदियों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दे दिया। इसके बाद राशिद ने डीएम हमीरपुर के समक्ष प्रमाणपत्र जारी करने की अर्जी दी, लेकिन जेल में रहने के कारण दागी बताते हुए डीएम ने प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया। इसके खिलाफ वह 2019 में हाईकोर्ट पहुंचे।
अधिवक्ता मनीष द्विवेदी ने दलील दी कि याची राजनीतिक बंदी था। उन्हें ''''खराब चरित्र'''' के लिए आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम, 1971 के तहत पकड़ा गया था। यह अधिनियम सियासी आधार के अलावा हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं होता। कोर्ट ने दलील मानते हुए कहा कि डीएम और मंडलायुक्त चित्रकूट धाम के आदेश में राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन के अलावा अन्य मामले का कोई साक्ष्य नहीं है। कोर्ट ने याची को तीन महीने के भीतर प्रमाणपत्र जारी करते हुए सभी लाभ देने का आदेश दिया।