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हाईकोर्ट ने कहा : आम आदमी की तरह सरकारी दफ्तरों की याचिका भी परिसीमा के दायरे में, याचिका खारिज

Fri, 05 Jan 2024 03:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के सेवानिवृत प्रधान वैज्ञानिक रविंद्र कुमार त्यागी के पक्ष में पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि देर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की इजाजत सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती कि वह सरकारी विभाग की ओर से दाखिल की गई है। आम लोगों की तरह सरकारी दफ्तरों पर भी याचिका दाखिल करने की परिसीमा लागू है। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कैट के आदेश के खिलाफ 638 दिन बाद दाखिल याचिका निरस्त कर दी।

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न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के सेवानिवृत प्रधान वैज्ञानिक रविंद्र कुमार त्यागी के पक्ष में पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। प्रधान वैज्ञानिक ने सेवानिवृत्ति के करीब 11 साल बाद वेतनवृद्धि की मांग को लेकर कैट में प्रार्थना पत्र दिया था।

कैट ने सुप्रीम कोर्ट से निर्धारित विधि व्यवस्थाओं के आलोक में 17 दिसंबर 2021 को आवेदन स्वीकारते हुए सेवानिवृत्ति के एक साल पूर्व के वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची परिषद के वकील नरेंद्र प्रताप सिंह ने दलील दी कि प्रधान वैज्ञानिक ने सेवानिवृत्ति के 11 साल बाद वेतन वृद्धि के लाभ का दावा किया था, जबकि इसके लिए परिसीमा अवधि एक साल ही है।

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हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

प्रधान वैज्ञानिक को इसी अवधि में अपील दायर करनी चाहिए थी। इस दौरान कोर्ट ने परिषद की ओर से 638 दिन बाद याचिका दाखिल करने को लेकर आपत्ति उठाई तो विभाग ने दलील दी कि याचिका दाखिल करने की अनुमति हासिल करने की सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के कारण देरी हुई है, इसलिए विभाग को छूट दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने परिषद की दलीलों को मानने से इन्कार करते हुए करीब दो साल देरी से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। कहा, परिसीमा अधिनियम के प्रावधान सरकार पर भी उसी तरह लागू होते हैं, जैसे कि आम वादकारियों के लिए।
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