मामले में एकल पीठ ने कमांडेंट द्वारा बर्खास्त किए गए होमगाड्र्स की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उनकी सेवा को सिविल सेवक के रूप में माना था। इसके साथ ही कमांडेंट द्वारा होमगाड्र्स की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया था।
एकलपीठ ने अपने नौ सितंबर 2021 के आदेश में कहा कि होमगाड्र्स यूपी होमगाड्र्स अधिनियम की धारा सात के तहत वालेंटियर के रूप में रजिस्ट्रर्ड होकर धारा आठ के तहत ड्यूटी पर तैनात किए जाते हैं। ड्यूटी पर तैनाती के दौरान वह सरकार की सेवा में रहते हैं। इसलिए वे भी सिविल सेवक माने जाएंगे। उनके साथ ही भारतीय संविधान की धारा 311 के तहत कार्रवाई की जाए।
यूपी सरकार ने एकल पीठ के आदेश को विशेष अपील के जरिए चुनौती दी। खंडपीठ के समक्ष सरकारी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने तर्क दिया कि एकली पीठ ने एक शब्द के आधार पर होमगाड्र्स को सरकारी कर्मचारी मान लिया। जबकि, होमगाड्र्स सेवा में कोई परीक्षा पास करके नहीं आते हैं। वे बतौर वालेंटियर जुड़ते हैं और स्वेच्छा से अपनी सेवा देते हैं। इसलिए वे सरकारी कर्मचारी नहीं हो सकते हैं। लिहाजा, एकल पीठ के आदेश को रद्द किया जाए। कोर्ट ने मामले में 31 मई को अपनी सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था।