इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत को पक्षपाती और अपशब्द बोलने के आरोपी अधिवक्ता हरीश चंद्र शुक्ला के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को भी अधिवक्ता के आचरण की जांच करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने हरिभान उर्फ मोनू उर्फ रमाकांत की जमानत अर्जी पर दिया। मैनपुरी के औंछा थाने में याची हरिभान व अन्य के खिलाफ एक दिसंबर 2023 को मुकदमा दर्ज कराया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हरिभान और कई सह-आरोपी हथियारों से लैस होकर घर पर हमला कर दिया। हमले में एक बेटी को गोली लगी और उसकी पत्नी और दूसरी बेटी घायल हो गई। इस मामले में जेल में बंद आरोपी हरिभान ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि छह व्यक्तियों ने कथित तौर पर गोली चलाई थी, लेकिन मृतक को केवल एक ही गोली लगी थी। इस मामले के एक सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता हरीश चंद्र शुक्ला ने दलीलें देने के लिए स्थगन की मांग की। अदालत ने अनुरोध अस्वीकार कर दिया, हालांकि उन्हें लिखित प्रस्तुतियां दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई। इस पर अधिवक्ता ने बाद में लिखित दलीलें पेश कीं, जिसमें उन्होंने अदालत पर पक्षपात का आरोप लगाया।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को आरोपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मामले का रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर उचित न्यायालय के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई से भी खुद को अलग कर लिया। इसे किसी अन्य पीठ के समक्ष रखने का आदेश दिया।