इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल किसी से शत्रुता, आपराधिक केस दर्ज होने और शस्त्र का दुरुपयोग करने की आशंका के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निलंबित या निरस्त नहीं किया जा सकता। आयुध अधिनियम के तहत शस्त्र लाइसेंस निरस्त करते समय डीएम को कारण बताना होगा।
यह टिप्पणी कर कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के हापुड़ के डीएम के आदेश व मेरठ के मंडलायुक्त की अपील में पारित आदेश रद्द कर दिया। साथ ही हापुड़ के डीएम को दो माह में नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने देवेंद्र सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची के खिलाफ बाबूगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके आधार पर डीएम ने शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने दलील दी कि लोक सुरक्षा व लोक शांति के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। डीएम व कमिश्नर ने मशीनी आदेश पारित किया। यह स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक के विशेषाधिकार का उल्लघंन है। कानून डीएम को फ्री हैंड नहीं देता। कोर्ट ने डीएम को आदेश को रद्द कर दिया।