याची के वकील ने दलील दी कि बाल विवाह निषेध अधिनियम विवाह के समय जो पक्ष बच्चा था, उसे यह अनुमति देता है कि वह घोषणा कर सके कि उसका विवाह शून्य था। वहीं, पत्नी के वकील ने दलील दी कि राहत का दावा सीमा अवधि के बाद किया गया है। अपीलकर्ता 2010 में 18 साल के हो गए थे। इसके तीन साल बाद 2013 में उन्होंने विवाह को शून्य घोषित करने के लिए वाद दाखिल किया।
न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता के पास मुकदमा दायर करने के लिए 23 वर्ष की आयु तक की सीमा थी। मुकदमा शुरू करने की तिथि पर अपीलकर्ता की आयु 23 वर्ष से कम थी। यह निर्विवाद है कि जोड़े के बीच बाल विवाह हुआ था, इसलिए विवाह को शून्य घोषित किया जाता है। पत्नी ने 50 लाख का स्थायी गुजारा भत्ता मांगा था। लेकिन, न्यायालय ने एक महीने के भीतर 25 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता भुगतान करने का आदेश दिया।