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UP : हाईकोर्ट का फैसला- मां को सगे बेटे से भरण-पोषण मिल रहा तो सौतेले से नहीं मांग सकती

Thu, 16 Jul 2026 11:52 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मां को सगे बेटे से भरण-पोषण मिल रहा है तो सौतेले से मांग नहीं कर सकती। किसी व्यक्ति के भरण-पोषण का दायित्व एक से अधिक लोगों पर बनता है तो अदालत तय कर सकती है कि किससे और किस अनुपात में राशि दिलाई जाए।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मां को सगे बेटे से भरण-पोषण मिल रहा है तो सौतेले से मांग नहीं कर सकती। किसी व्यक्ति के भरण-पोषण का दायित्व एक से अधिक लोगों पर बनता है तो अदालत तय कर सकती है कि किससे और किस अनुपात में राशि दिलाई जाए, लेकिन इस मामले में परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।

इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला की एकल पीठ ने महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। मुजफ्फरनगर परिवार न्यायालय ने सगे बेटे को प्रतिमाह आठ हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, जिसे महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा कि दोनों बेटों को भरण-पोषण देने का आदेश दिया जाए। इस पर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि सगा बेटा सक्षम है और भरण-पोषण का भुगतान कर रहा है। ऐसे में सौतेले बेटे पर भी वही दायित्व नहीं डाला जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण के मामले में अदालत यह देखती है कि आवेदक स्वयं अपना पालन-पोषण करने में असमर्थ है या नहीं। जिससे भरण-पोषण मांगा जा रहा है, उसके पास पर्याप्त साधन हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय के आदेश के बाद महिला को उसके सगे बेटे से नियमित भरण-पोषण मिल रहा है। ऐसे में अब वह स्वयं के भरण-पोषण के लिए सक्षम मानी जाएगी। 

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