पहले थे हिंदू, अब बन गया पादरी
स्थानीय हिंदू समुदाय के विरोध के बाद यह अनुमति तीन मई 2023 को वापस ले ली गई। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के 10 दिसंबर 2023 के आदेश में कहा गया कि साहनी ने चौराहे पर पंडाल लगाकर बड़ी संख्या में लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी। इस पर पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए साहनी ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी।
सरकारी वकील ने दलील दी कि याची पहले हिंदू था पर अब पादरी बन गया है। गवाह लक्ष्मण विश्वकर्मा ने बयान में आरोप लगाया था कि आवेदक हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता था, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। वहीं, याची के अधिवक्ता ने इन दलीलों को विरोध किया। कोर्ट ने मुकदमा रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी।
याची ने स्वयं को बताया हिंदू
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याची ने हलफनामे में स्वयं को हिंदू बताया था। इस विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश-1950 के अनुसार हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सी.सेल्वरानी बनाम विशेष सचिव मामले का हवाला दिया, जिसके अनुसार धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण व अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए जाति-आधारित पहचान का दावा करना संविधान के साथ धोखाधड़ी है। इसके साथ ही महाराजगंज के डीएम को तीन महीने में याची के धर्म की जांच करने और यदि हलफनामे में धोखाधड़ी पाई जाती है तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।