हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को विवाह के बाद उनपर विभिन्न धाराओं में दर्ज कराए गए मुकदमों में राहत देते हुए आदेश की प्रति तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा अग्रिम सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जिला सम्भल के बनियाठेर थाने में प्रेम विवाह करने वाले युवक के खिलाफ 31 दिसंबर 23 को केस दर्ज किया गया था।
इसमें अगवा कर शादी के लिए मजबूर करना समेत धमकी देने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि प्रेम विवाह करने वाले दोनों वयस्क हैं। उन्होंने अपनी मर्जी से शादी करने के बाद इसका पंजीकरण भी करवाया है। आरोपी युवक को बिना किसी कारण आपराधिक मामले में शामिल किया गया है।
सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सिद्धार्थ वर्मा और अनीष कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए अग्रिम आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके अलावा आदेश की प्रति सुनवाई वाले दिन ही शाम तक उपलब्ध करवाने को कहा है। प्रतिवादी को तीन सप्ताह की अवधि के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पवन कुमार पांडेय ने बताया कि धारा 366 व 506 में दर्ज एफआईआर में कोर्ट ने राहत दी है। साथ ही मेरी विनती पर कोर्ट ने आदेश की प्रामाणिक प्रति आदेश के बाद ही जारी कर दी है। इससे याची को राहत मिली है।