पीड़िता और अपीलकर्ता दोनों मुस्लिम
अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता की चिकित्सा जांच रिपोर्ट के अनुसार उसकी उम्र 16 वर्ष से अधिक थी। हालांकि, 18 वर्ष से अधिक नहीं थी। पीड़िता और अपीलकर्ता दोनों मुस्लिम थे और उन्होंने निकाह किया था। पीड़िता के बयान से यह स्पष्ट था कि शारीरिक संबंध विवाह के बाद स्थापित हुए थे। ऐसे में उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने 2017 में सुप्रीम कोर्ट के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले का हवाला दिया। इसके तहत 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध भी बलात्कार माना गया। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि यह फैसला भविष्य के प्रभाव से लागू होगा। इसलिए 2005 की घटना में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लागू नहीं होगा। कोर्ट ने अपीलकर्ता को दुष्कर्म के साथ ही अन्य आरोप से बरी कर दिया और अपील स्वीकार कर ली।