इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना अनुमति एक ग्राहक के खाते से 12 हजार रुपये दूसरे खाते में भेजने के मामले में बर्खास्त पंजाब नेशनल बैंक के एक हेड कैशियर को राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने बैंक की कार्यवाही को सही ठहराया और बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ ने देवेंद्र कुमार शर्मा की याचिका पर दिया।
याची बुलंदशहर के अनूपशहर शाखा में हेड कैशियर के पद पर कार्यरत था। नौ मार्च 2012 को मोबिन खान ने शिकायत की कि याची ने उनकी बिना अनुमति के उनके खाते से 12 हजार रुपये किसी अन्य खाते में भेज दिया है। विभागीय जांच के बाद 20 मई 2013 को याची को बर्खास्त कर दिया गया था। उनकी विभागीय अपील भी खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि हेड कैशियर ने पैसे वापस कर दिए थे और यह एक छोटी गलती थी। इसके लिए बर्खास्तगी का बड़ा दंड अपराध के अनुपात में अधिक है। बैंक के अधिवक्ता दलील दी कि याची ने गंभीर वित्तीय अनियमितता की है। बैंककर्मी को उच्च नैतिक मापदंडों पर खरा उतरना चाहिए। कोर्ट ने बैंक की दलीलों को स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।
छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी प्रबंधक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी मेरठ के मौलाना आजाद इंटर कॉलेज ललियाना के प्रबंधक शकील अहमद के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही शिकायतकर्ता अपराध अनुसंधान संगठन को तत्कालीन उप निरीक्षक को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने अधिवक्ता सुनील चौधरी की दलीलें सुनने के बाद दिया।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्ष 2010-11 में कॉलेज को मिली 33,78,135 रुपये की अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की पूरी धनराशि 682 बच्चों को बैंक चेक के माध्यम से वितरित की गई थी। जांच अधिकारी के समक्ष 82 छात्रों व उनके अभिभावकों ने भी यह बयान दिया कि उन्हें छात्रवृत्ति मिली है। बैंक प्रबंधक ने भी इस बात की पुष्टि की है। इसके बावजूद आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया। कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को नियत की है।